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संपादकीय
गाजियाबाद में बढ़ रहे हैं अवैध निर्माण PDF Print E-mail
संपादकीय - पत्र
Written by मीडियाभारती सिंडीकेशन सर्विस   
Tuesday, 23 April 2013 08:50

गाजियाबाद शहर में लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं। समय रहते इसकी उचित जांच होनी चाहिए। हर जगह बेसमेंट बन रहे हैं।

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राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है रेशम उद्योग PDF Print E-mail
संपादकीय - आलेख
Written by एजेसियां   
Sunday, 21 April 2013 09:07

रेशम भारतीयों की जिंदगी और संस्कृति में घुला-मिला है। रेशम उत्पादन में भारत का समृद्ध और व्यापक इतिहास रहा है और रेशम के व्यापार का इतिहास 15वीं सदी से चला आ रहा है। रेशम के व्यापार के लिए प्रचलित सभी पांचों प्रकार के रेशम-मल्बेरी, उष्णकटिबंधीय तसार, शाहबलूत तसार, इरी और मुगा भारत की विशिष्टता है। इनमें से सुनहरा मुगा भारत की अनूठी विशिष्टता है। भारत के परंपरागत और सांस्कृतिक घरेलू बाजार और रेशम वस्त्रों की उत्कृष्ट विविधता की वजह से भारत रेशम उद्योग में अग्रणी स्थान रखता है। (Read in English: Silk Sector – Boosting The National Economy)

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पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों की है महत्‍वपूर्ण भूमिका PDF Print E-mail
संपादकीय - आलेख
Written by एजेसियां   
Sunday, 21 April 2013 08:49

वित्‍तीय बाजारों में वैश्विक अनिश्चितता हमारी अर्थव्‍यवस्‍था को लगातार प्रभावित कर रही है। हाल में किए गए सुधारों और सरकारी नीतियों से उभरकर सामने आ रही स्‍पष्‍टता से विदेशी संस्‍थागत निवेश वृद्धि हुई है। इससे पूंजी बाजार को बढ़ावा मिला है, लेकिन अभी भी पूंजी बाजार की व्‍यापकता एक चुनौती बनी हुई है और सेंसेक्‍स में फिर से उछाल के बावजूद खुदरा निवेशक इससे दूरी बनाए हुए हैं। (Read in English: Retail Investors – The Game Changers In Market)

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लाल फीताशाही और दलालों से छुटकारा दिला सकता है ई-बिज सॉल्युशन PDF Print E-mail
संपादकीय - आलेख
Written by अमित गुइन   
Saturday, 20 April 2013 09:12

भारत में नया कारोबार शुरू करने या नई औद्योगि‍क इकाई लगाने के बारे में पड़ताल करना एक जटि‍ल प्रक्रि‍या है। इसका कारण,  यह जटि‍ल और उलझा हुआ तथ्‍य है कि ऐसा करने के लि‍ए वि‍भि‍न्‍न स्‍तरों पर कई सरकारी एजेंसि‍यों से लाइसेंस और चालान लेने की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं, यदि कोई नि‍वेशक इन सेवाओं के बारे में जरूरी जानकारी प्राप्‍त करना चाहे, तो वह अक्‍सर वि‍वि‍ध वेबसाइट्स पर उपलब्‍ध कई तरह के कानूनों, नि‍यमों और प्रक्रि‍याओं में ही उलझकर रह जाता है। परि‍णामस्‍वरूप उचि‍त जानकारी के अभाव और उसके बाद बि‍चौलि‍ए के मार्ग-दर्शन पर नि‍र्भर होने की वजह से एक औसत नि‍वेशक दुवि‍धा में घि‍र जाता है और खुद को हारा हुआ महसूस करता है।

 

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भारतीय संस्‍कृति और वि‍श्‍व PDF Print E-mail
संपादकीय - आलेख
Written by डॉ. सूरत सिंह   
Tuesday, 16 April 2013 08:33

 

विश्‍व के अनेक देशों के निवासियों की भारतीय संस्‍कृति में सदैव विशेष रुचि रही है, ये लोग इसके बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहते हैं। भारत के ऋषि-मुनियों ने 5000 से अधिक समय पहले समाज और व्‍यक्ति के लक्ष्‍यों की व्‍याख्‍या की। कुल मिलाकर ऐसी व्‍याख्‍या आज भी कायम है लेकिन समयानुकूल दृष्टिकोण में कुछ परिवर्तन आता गया।

Last Updated on Tuesday, 16 April 2013 10:24
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  • Reservation Policy In Medical Colleges

    New Delhi: The details of medical education institute receiving financial assistance from Central Government along with the courses having reservation for OBC & SC/ST in their admission is annexed. The quota of OBC/SC/ST is allocated as per statutory reservation of 27%, 15% & 7.5% respectively.

 

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  • ‘Development Projects Has Deprived Tribes Folk Of Their Land’

    Thiruvananthapuram: A study conducted by centre for development studies and Kerala Research Programme on local level development entitled ‘Alienation, degradation and enslavement of tribal women in Attapapdy reveals that displacement for development projects has deprived tribes folk of their land and forests from which much of their food came.

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